शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

कोई तो हो

 कोई तो हो


जो झुकते काँधों पे हाथ रख के उदास आँखों का हाल पूछे

जो हँसते चेहरों के पीछे बहते आंसुओं पे सवाल पूछे

उनींदी रातों की अल सुबह ही सियाह धुंध को शफ़्फ़ाक करके  

हमारी बेचैन धड़कनों से तमाम वजह ए मलाल पूछे


कोई तो हो


कोई तो हो


जो हमसे पूछे कि कल सुबह तुम क्या कर रहे हो

हमसे पूछे कि अगले हफ़्ते क्या छुट्टियों पे निकल रहे हो?

हमें जताए कि क्या पता क्यूं अब के लीची पे बौर कम है

कहे कि बेमौसम की बारिश से तुम बेवजह ही डर रहे हो


कोई तो हो


कोई तो हो


जो काली रातों का बढ़ना रोके समय का बहता पसीना पोंछे

दिलासा दे जो उदासियों को सूरजों का कुहासा पोंछे

जो तपती राहों में छांव कर दे सब के पैरों के घाव भर दे

तुम्हारी आँखों के डर मिटाए हमारे दिल की निराशा पोंछे


कोई तो हो



©2025 डॉ रविंद्र सिंह मान