सफ़र के बाद
बुधवार, 26 फ़रवरी 2020
शहर की आग को तुमने आज गुलाब लिखा है
›
नदी में बहते खून को अक्सर आब लिखा है शहर की आग को तुमने आज गुलाब लिखा है आग लगाकर गलियों-गलियों, सत्ताओं ने सच हों जिसकी ताबीरें वो ख़...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें